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Tuesday, 17 April 2012

खुशी


हरप्रीत सिंह राणा

बहू-बेटे ने बापू की चारपाई पशुओं के बाड़े में डाल दी। एक दिन सुबह-सुबह खुशी में मस्त बेटा मिठाई का डिब्बा ले बापू के पास जाकर बोला, “बापू! बधाई हो! तेरे पोता हुआ है।”
बापू एकटक बेटे की ओर देखता रहा।
“क्या बात बापू, तुझे खुशी नहीं हुई?” बेटा बापू के व्यवहार से झुँझला कर बोला।
“पुत्तर! खुशी तो बहुत है…पर मैं तेरे बारे में सोच रहा हूँ…”
“क्या बापू? बेटे ने उत्सुकता से पूछा।
“अब मेरे बाद इस चारपाई का वारिस तूने ही बनना है…।”
बापू की व्यंग्यभरी बात के आगे बेटा निरुत्तर था।
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Saturday, 2 July 2011

भड़ास


हरप्रीत सिंह राणा

दिन भर दफ्तरी फाइलों में मगज खपा, छुट्टी के बाद वह थका-हारा सुस्त रफ्तार से साइकिल चलाता हुआ घर जा रहा था। एक मोड़ पर उसका साइकिल दूसरी ओर से आ रहे दो लाल फीतियों वाले शराबी के साइकिल से जा टकराया। दोनों गिरते-गिरते बचे। गलती पुलिसवाले की थी। वह शराब के नशे में गुट्ट, गलत दिशा में चल रहा था।  पुलिसवाला उसकी गाल पर एक ज़ोरदार थप्पड़ जड़ दहाड़ा, “साले, अँधा है क्या? देख कर साइकिल नहीं चला सकता?”
वह गुस्से में काँपने लगा, पर शराबी पुलिसवाले के आगे कुछ भी बोलने की हिम्मत न कर सका। वह सब्र का घूँट पी कर रह गया। एक दफ्तरी बाबू हवलदार के सामने क्या बोलता। हवलदार की गालियाँ सुनता वह चुपचाप अपने राह चल दिया। लेकिन इस असहनीय अपमान से उसकी मानसिक दशा बिगड़ गई थी। वह हाँफता हुआ तेजी से सइकिल दौड़ाता रहा था। मन ही मन वह उस पुलिसवाले की माँ-बहन एक करता हुआ मन को शांति दे रहा था।
अचानक उसका साइकिल पैदल जा रहे एक प्रवासी मज़दूर में जा टकराया। मज़दूर दिन भर की मेहनत के बाद रात के भोजन के लिए राशन का थैला उठाए जा रहा था। मज़दूर गिर गया और उसके थैले का राशन सड़क पर बिखर गया। उसने गिर गए मज़दूर की पसलियों पर चार-पाँच ठोकरें लगा दीं। मज़दूर दर्द से चीख उठा।
“कुत्ते, हरामजादे…तेरी बहनकी…साले, एक तरफ होकर नहीं चल सकता?” उसने गालियों की बौछार कर दी। फिर एक-दो लातें और जमा साइकिल उठा बड़बड़ाता हुआ घर की ओर चल दिया। अब उसकी आँखों में जीत की चमक थी और मन हल्का फूल-सा हो गया था।
मज़दूर दर्द से कुरलाता हुआ उठा। उसकी आँखों से परल-परल आँसू बह रहे थे। तभी वहाँ से गुजरने वाला एक आवारा कुत्ता सड़क पर बिखरे आटे को सूँघने लगा। मज़दूर ने फुर्ती से सड़क पर गिरी अपनी जूती उठाई और ज़ोर से कुत्ते के दे मारी। कुत्ता ‘चऊँ-चऊँ’ करता हुआ भाग गया। मज़दूर ने कुत्ते को एक भद्दी-सी गाली दी और बिखरा सामान समेटता हुए अपने राह चल दिया।
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Thursday, 28 April 2011

हवस


हरप्रीत सिंह राणा
वह एक बिगड़ा हुआ अमीर ज़मींदार था। शराब और शबाब उसकी कमज़ोरी थे। उसकी हवेली में अकसर मासूम लड़कियों की सिसकियों की आवाज सुनाई देतीं। कुछ लाचारी में और कुछ जबरदस्ती उसकी हवस का शिकार होतीं। दौलत और राजनीतिक रसूख के कारण कोई भी उस पर उँगली उठाने का साहस नहीं करता।
शाम का समय था। जमींदार अपनी बैठक में शराब पी रहा था। बैठक की एक दीवार पर लगी सुंदर सुस्कराती चेहरे और नशीली नीली आँखों वाली नंगी औरत की तस्वीर लगी थी। तस्वीर को देखकर उसकी आँखों में लाल डोरे तैरने लगे।
अकस्मात लगभग अठारह वर्ष की एक औरत के साथ सेवक ने कमरे में प्रवेश किया। गोरे रंग, काले बाल, हाथों में मेहंदी, बाहों में चूड़ियाँ, माँग में सिंदूर। औरत का चेहरा मासूम और भयभीत था। ज़मींदार का भयानक चेहरा देख औरत भय से सिकुड़-सी गई।
“हज़ूर! यह घुल्ले ड्राइवर की घरवाली कमला है। अभी छः महीने पहले ही शादी हुई है। घुल्ले का एक्सीडेंट हो गया। शहर के हस्पताल में मौत से लड़ रहा है। घरवाले के इलाज के लिए पैसे उधार लेने आई है…।” सेवक बता रहा था।
ज़मींदार का चेहरा चमक उठा। भूखी नज़रों से कमला को निहारते हुए सेवक को इशारा किया। सेवक ने फुर्ती से बाहर निकल कमरे का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया। बंद दरवाजा और ज़मींदार का भयानक रूप देख कमला सूखे पत्ते की तरह काँपने लगी।
“घबरा मत, मेरे होते हुए तेरे घरवाले को कुछ नहीं होगा। यह ले पैसे…” अपनी जाकिट की जेब से सौ-सौ रुपये के नोटों की गड्डी निकाल ज़मींदार ने पलंग पर फेंक दी। नोट देख कमला की आँखों में लाचारी के आँसू आ गए। वह रुपये उठाने के लिए पलंग की ओर बढ़ी। ज़मींदार ने उसे पीछे से बाहों में जकड़ पलंग पर गिराते हुए कहा, “मेरी जान, पहले ब्याज तो चुका दे।”
रात भर बेबस सिसकियों की आवाज़ ज़मींदार की गर्म साँसों तले दम तोड़ती रहीं। सुबह नोटों की गड्डी उठा बदहवास कमला अस्पताल जाने के लिए शहर को जाने वाली सड़क की ओर दौड़ पड़ी।
शाम को ज़मींदार फिर बैठक में बैठा शराब पी रहा था। उसका सेवक कमरे में प्रवेश करते हुए बोला, “हज़ूर! बहुत बुरी खबर है…घुल्ला ड्राइवर मर गया।”
“ओए गधे, इस बुरी खबर का मुझ से क्या संबंध! मर गया तो मर गया।” ज़मींदार बोला।
“हज़ूर! पता लगा है कि घुल्ले को एड्स की बीमारी थी। उसकी घरवाली का भी टैस्ट हुआ, उसे भी एड्स है…।” सेवक एक ही साँस में बोल गया।
“क्या?” ज़मींदार के हाथ से शराब का गिलास फर्श पर गिरकर चकनाचूर हो गया।
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