सतिन्द्र कौर
“क्या हुआ?”
“एक्सीडेंट! ट्रक वाले ने एक आदमी को नीचे दे दिया।”
वह भीड़ में आगे बढ़ा। खून से लथपथ लाश उससे देखी न गई।
“चावल तो बासमती लगते है?” उसके कान में आवाज पड़ी।
“बढ़िया बासमती है। देख न कितनी अच्छी महक आ रही है।”
“ओ हो! कितना ज्यादा नुकसान हो गया। पाँच किलो तो होंगे ही?”
“हाँ। थैला भरा था।”
उसने देखा, उसके पास ही खड़े मैली बनियान पहने दो आदमी लाश के पास बिखरे पड़े चावलों को बड़ी हसरत से देख रहे थे।
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