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Sunday, 4 July 2010

ताँगेवाला


गुरमेल मडाहड़


सवारियों से भरा ताँगा चढ़ाई चढ़ रहा था। घोड़ा पूरा जोर लगाकर ताँगा खींच रहा था। ताँगे की बम्बी से ताँगेवाला नीचे उतरा । उसने सवारियों को भार आगे करके बैठने का इशारा किया। चाबुक की मार और मालिक की हल्लाशेरी से घोड़े ने अपना बाकी का जोर भी ताँगा खींचने में लगा दिया। ताँगेवाला ताँगे के साथ-साथ चलने लगा।

घोड़े की टाँग खराब है?घोड़े को लंगड़ाते देख एक सवारी ने आगे झुकते हुए पूछा।

हाँ।

फिर आराम करवाना था इसे।

डेढ़ माह के बाद आज ही जोता है।

सवारियाँ कम बैठा लिया कर।

कम कैसे बैठा लिया करूँ? आठ रुपए किलो के हिसाब से दो किलो चने। चार रुपए का दस किलो चारा। चार रुपए का दस किलो भूसा और पाँच रुपए का मसाला। उनतीस-तीस रुपए घोड़े को चराकर, दस रुपए मुझे भी घर का खर्च चलाने को चाहिएँ।

वह तो ठीक है, पर शास्त्रों में लिखा है कि जो व्यक्ति किसी को इस जन्म में तंग करता है, उसका बदला उसे अगले जन्म में देना पड़ता है।सवारी बोली।

पहले इस जन्म के बारे में सोच लें, अगले जन्म की अगले जन्म में देखी जाएगी।कहकर ताँगेवाले ने घोड़े को चाबुक मार दिया।

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Tuesday, 30 March 2010

एहसास


गुरमेल मडाहड़


शादी से पहिले वे जब भी एक-दूसरे से मिलते, तो जसजीत वीना के जूड़े में बड़े प्यार से फूल लगाता। वह उसे काफी देर तक सहलाती रहती और कहती, जसजीत, मुझे एक बेटा दे दे, बिलकुल तुम जैसी अक्ल-शक्ल हो।

फिक्र न कर, तेरी यह इच्छा भी जल्दी ही पूरी हो जाएगी।जसजीत कहता।

फिर उनकी शादी हो गई। शादी के बाद उसे कई बार माँ बनने की आशा हुई, पर बार-बार वह बीमार पड़ती रही। इस बीच जसजीत फूल-वूल लगाना सब भूल गया। उसे हर समय वीना की चिंता खाए रहती थी। कई डॉक्टर बदलने के बाद आखिर वे सफल हो ही गए। उनके घर बेटे ने जन्म लिया। जसजीत बहुत खुश था। उसने बच्चे को खूब प्यार किया, वीना को मुबारकबाद दी और उसके जूड़े में फूल लगाने लगा।

वीना बोली, जसजीत, अब मेरे यह फूल न लगाया कर।

क्यो? अब मेरा फूल लगाना तुझे अच्छा नहीं लगता?

नहीं, यह बात नहीं।

फिर?

फूल तोड़ने के लिए नहीं, देखने और प्यार करने के लिए होते हैं।

अच्छा!

हाँ…कोई फूल कितनी मुश्किलों के बाद खिलता है, यह एक माँ ही जान सकती है, कोई और नहीं।

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