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Sunday, 4 March 2012

पराया दर्द


एम. अनवार अंजुम

ज़ैलदार हरनाम सिंह की पत्नी ने तीसरी बार भी लड़की को जन्म दिया तो उसका दिल ही टूट गया। दुखी ज़ैलदार बोझिल कदमों से गुरुद्वारे पहुँचा। वह अरदास करने लगा, हे वाहेगुरु! मैंने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है जो हर बार मुझे लड़की ही देते हो। इन लड़कियों से तो मैं बे-औलाद ही भला था। मुझे एक बेटा चाहिए, मेरा वारिस और खानदान चलाने वाला।
हरनाम सिंह अपनी अरदास में व्यस्त था। तभी गाँव का सरपंच साधू सिंह वहाँ आया। साधू सिंह के पास करोड़ों की जमीन-जायदाद थी। वह अरदास कर रहा था, हे वाहेगुरु! तुम्हारे घर किस चीज की कमी है। मुझे भी एक औलाद दे दे। मैं तो तुमसे लड़का भी नहीं मांगता, मुझे तो चाहे लड़की ही दे दे। मैं भी ‘पिता’ कहलाने का आनंद ले सकूँ। मुझ पर कृपा कर वाहेगुरु, कहीं मैं  दुनिया से बेऔलाद ही न चला जाऊँ।
सरपंच साधू सिंह की यह प्रार्थना सुन कर ज़ैलदार हरनाम सिंह भगवान का शुक्र मनाता हुआ अपने घर की ओर चल दिया। घर पहुँच कर उसने अपनी नई जन्मी बेटी को गले से लगा लिया।
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Saturday, 9 July 2011

अंतर

एम. अनवार अंजुम

राजकीय प्राथमिक विद्यालय से पाँचवीं की परीक्षा पास करने के पश्चात राजू ने राजकीय हाई स्कूल में दाखिला ले लिया।
प्राथमिक स्कूल में पढ़ते समय उसे स्कूल से अनुपस्थित रहने की आदत पड़ गई थी। हाई स्कूल में भी वह पाँच दिन अनुपस्थित रहने के बाद स्कूल पहुँचा। कक्षा इंचार्ज ने उसे कक्षा से बाहर कर दिया।
राजू बाहर जाने की जगह मैडम रश्मि के पास गया और उस की टाँगें दबाने लग गया। मैडम ने उसे परे धकेलते हुए कहा, जा, अपने पिता को साथ लेकर आना।
यह सुन राजू ने मिन्नत की, मैडम, मुझे क्लास से बाहर न निकालो। मैं आप के बालों में तेल की मालिश कर दिया करूँगा।
बद्तमीज, निकल जा अभी स्कूल से बाहर…।मैडम ने राजू के मुँह पर जोरदार चपेड़ मारते हुए हुक्म सुनाया।
अपनी गाल को पलोसते हुए स्कूल से बाहर जाते हुए राजू पहले वाले स्कूल की मैडम और मैडम रश्मि के व्यवहार में अंतर का कारण ढूँढ़ने का प्रयास कर रहा था।
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