Friday, 6 May 2011

चेतना


नायब सिंह मंडेर
बेटे को पैसे देकर जाना, कई दिनों से माँग रहा है। स्कूल में कोई पाल्टी-पूल्टी करनी है।संतरो ने तवे पर रोटी डालते हुए कहा।
कैसी पार्टी करनी है? बड़े महाराजा ने!भाट दीनू ने कँधे पर खाकी थैला लटकाते हुए कहा।
अब बाहर आके बता दे, अंदर क्या झख मार रहा है! फिर मेरा सिर खाएगा, इसके जाने के बाद।संतरो ने अंदर बैठे अपने बेटे रामू से कहा।
रामू बाहर आकर कच्चे मकान के एक कोने में कँधा टिका कर खड़ा हो गया और तिनके से दीवार खुरचने लगा।
इस माँ को क्यों छेड़ रहा है? क्या रुपयों का ढेर पड़ा है, इसे बनाने के लिए। सीधा होकर बता, क्या करने हैं पैसे? साथ ये भी बता कि किस चीज की पार्टी करनी है स्कूल में?दीनू ने रामू से पूछा।
स्कूल में पार्टी करनी है, साथ में ग्रुप-फोटो। मास्टर कहते हैं फिर तो तुमने आठनीं पास करके स्कूल से चले जाना है। स्कूल के लिए कोई चीज गिफ्ट देकर जाओ, पक्की निशानी बन जाएगी हमारी।रामू ने विस्तार से समझाया।
कितने पैसे मंगवाए हैं?रामू असल मुद्दे पर आया।
दो सौ।
दो सौ…!! कहाँ से लाऊँ इतने पैसे, काम तो अब चलता नहीं। पहले लोग इज्जत भी करते थे और साथ में पैसे भी देते थे। अब तो कोई देखकर भी राजी नहीं।दीनू ने दुखी मन से कहा।
अब तो मुझे बच्चे भिखमंगी-जात कहकर छेड़ते हैं…साथ में कहते हैं, इनके पास पैसों की क्या कमी है, हमारे सारे पैसे माँग-माँग कर इकट्ठे कर लिए।रामू ने भरे मन से कहा तो आँखों से आँसू टपक पड़े।
हम मीरजादे हैं, मीरजादे। कोई भिखमंगी जात नहीं। पैसे यूँ ही नहीं माँगते। पहले उनके घर के लिए दुआ माँगते हैं, सुख माँगते हैं।दीनू ने मन की भड़ास निकाली।
यह काम छोड़कर कोई और कर लो, दिहाड़ी कर लो।झाड़ू से आँगन साफ करती पाँचवीं कक्षा में पढ़ती मीतो ने कहा।
हाँ बेटा, जरूर करूँगा कोई और काम; मेरे बाप ने मुझे माँगना ही सिखाया है, दिहाड़ करनी नहीं। मैं तुम्हें पैसा-पैसा माँग कर पढ़ा रहा हूँ, माँगना तो नहीं सिखा रहा…यह ले सौ रुपए आज, बाकी कल ले जाना। दीनू ने रामू को सौ रुपये देते हुए कहा।
नहीं, मैंने लोगों से माँगे पैसे लेकर नहीं जाना। मैं तो माँ को लोगों के घरों में किए गए काम से मिले पैसों से काम चला लूँगा।
वाह बेटा! मेरी आँखें खोल दी तूने। सच में मेहनत-मज़दूरी की कमाई में कितनी ताकत है! आज से मैंने माँगना छोड़ा, दिहाड़ी करूँगा अब।दीनू ने  खाकी थैला चारपाई पर ऱख, डंडा फेंकते हुए कहा।
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2 comments:

वन्दना said...

सुन्दर सीख देती कहानी।

Kuldeep Thakur said...

मुझे आप को सुचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि
आप की ये रचना 10-05-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।